एक गरीब किसान का बेटा सिपाही से सीधे बना IPS अफसर, पिता की आंखों में खुशी के आंसू

10वीं पास करने के बाद भर्ती हुए इस युवक को आईपीएस ऑफिसर बनने के लिए कई सालों तक कड़ी मेहनत और तैयारी करनी पड़ी. आज हम आपको एक ऐसे युवक के बारे में बताने जा रहे हैं जो सिपाही के तौर पर पुलिस सेवा में शामिल हुआ था लेकिन उसका लक्ष्य कुछ और था. कड़ी मेहनत और लगन के दम पर इस युवक ने आईपीएस अधिकारी का पद हासिल किया.

एक कांस्टेबल के रूप में काम करते हुए, उन्होंने स्नातक होने के बाद यूपीएससी की परीक्षा दी. हम आपको राजस्थान के विजय सिंह गुर्जर के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने यूपीएससी परीक्षा 2018 पास की और आईपीएस पद हासिल किया. लेकिन ये इतना आसान नहीं था. वह पढ़ाई में इतने आम थे कि उन्होंने कहा, “अगर मैं कर सकता हूं, तो कोई भी कर सकता है.”

विजय सिंह गुर्जर राजस्थान के झुंझुनू जिले के रहने वाले हैं. वह खुद एक साधारण किसान परिवार से आते हैं. उन्होंने दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल बनने के लिए कड़ी मेहनत की और अपने परिवार में पहले अधिकारी बने. उनकी शिक्षा गांव के एक सरकारी हिंदी माध्यम स्कूल में हुई थी.

पिता खेती करते थे और परिवार का पेट भरते थे. विजय सुबह 4 बजे उठकर खेतों में काम पर चले जाते थे. फिर घर वापस जाकर सात बजे फिर से स्कूल जाते. उनके घर की स्थिति ठीक नहीं थी. परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वह 10वीं के बाद आगे की पढ़ाई नहीं कर सके और नौकरी की तलाश करने लगे.

नौकरी की तलाश में रहते हुए वे सरकारी नौकरी की तैयारी भी कर रहे थे. उनका एक दोस्त दिल्ली पुलिस में था. उन्होंने भी फॉर्म भरना शुरू कर दिया और आवेदन किया और दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल भर्ती की तैयारी शुरू कर दी. जब परीक्षा परिणाम आया, तो उनका चयन बहुत अच्छे अंकों के साथ हुआ था.

वह खुद को कमजोर छात्र मानते थे. लेकिन उन्होंने अपने पहले प्रयास में ही दिल्ली पुलिस की परीक्षा पास कर ली और उनका आत्मविश्वास बढ़ा. एक किसान परिवार के लिए सिपाही की नौकरी बहुत बड़ी नौकरी थी. लेकिन विजय यहीं नहीं रुके, उन्होंने और आगे जाने का फैसला किया.

फिर उन्होंने 2014 में यूपीएससी की तैयारी शुरू की और चौथे प्रयास में परीक्षा पास की और आयकर अधिकारी बन गए. लेकिन फिर भी वह संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने आईएएस बनने का फैसला किया. उन्होंने 2017 में अपने पांचवें प्रयास में 574 रँक लाया.

इसके बाद वह भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हो गए. एक कांस्टेबल से सीधे-सीधे आईपीएस अधिकारी बनने से उनके पिता की आंखों में आंसू आ गए. वह अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को देते हैं जिन्होंने संकट के समय भी उन्हें सिखाया.