बच्चे की देखभाल करते हुए 10-12 घंटे की पढ़ाई, आखिरकार IAS अफसर बन गई यह माँ

कहा जाता है कि जब एक महिला माँ बनती है तो उसकी आत्मा बच्चे में निवास करती है. बच्चे को तकलीफ होने लगे तो माँ को भी तकलीफ होती है. माँ बनने के बाद एक महिला बिझी हो जाती है और उसे बच्चे के अलावा कुछ नहीं दिखता. वह बच्चे की भूख, खेलने, सोने में मगन रहती है.

लेकिन हरियाणा के एक गांव की एक माँ ने अफसर बनने का सपना देखा. उसने लड़के को दूर करने का फैसला नहीं किया, बल्कि देखभाल और परवरिश के साथ पढ़ाई करने का फैसला किया. यह फैसला किसी चुनौती से कम नहीं था. इस चुनौती को पार करते हुए वह घर, परिवार, बच्चों और पति के साथ पढ़ाई की जिम्मेदारी निभाते हुए अधिकारी बनीं.

एक बच्चे की जिम्मेदारी निभाते हुए यूपीएससी परीक्षा पास करने वाली इस गृहिणी की सफलता की कहानी आपको सोचने पर मजबूर कर देगी. एक माँ होने के नाते एक महिला अकेले ही सारे कष्ट सह सकती है. यह कहानी पुष्पा लता की है.

पुष्पा का जन्म हरियाणा के रेवाड़ी जिले में हुआ था. उनके गाँव में अच्छे स्कूल न होने के कारण वह अपने चाचा के घर रहकर पढ़ाई करती थी. बीएससी के बाद उन्होंने एमबीए किया. फिर उन्हें बैंक ऑफ हैदराबाद में नौकरी मिल गई. 2011 में शादी के बाद वह मानेसर आई और वहां से यूपीएससी की परीक्षा दी. उनके डॉक्टर पति ने भी उनका साथ दिया.

एक गृहिणी होने के बावजूद, पुष्पा लता जी ने 2017 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 80 वीं रैंक हासिल किया. पुष्पा जी का संघर्ष भी कम नहीं था. एक तरफ उन्हें बच्चों, पति और परिवार की देखभाल करनी थी और दूसरी तरफ उन्हें अपने सपनों की तैयारी भी करनी थी.

पुष्पा जी की शादी कम उम्र में ही हो गई थी. शादी के बाद वह घर की देखभाल करने लगी. वह रिश्तेदारों को ताना मारते हुए सुना करती थी कि औरतें शादी के बाद सिर्फ घर के कामों के लिए होती हैं. गांव के लोगों ने भी उससे बात की, लेकिन उन्होंने उन पर ध्यान नहीं दिया. उन्होंने तय किया कि एक दिन वह कुछ नया करेगी.

पुष्पा जी की दिनचर्या बहुत कठिन थी. सुबह उठकर खाना बनाना, घर का काम करना और बच्चों की देखभाल करना. उसने यह सब किया और किताबें पढ़ने का समय भी निकाला. उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की और अपने सपनों को साकार किया. उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि कड़ी मेहनत, लगन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

पूर्णकालिक गृहिणी पुष्पा जी ने दूसरे प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा पास की. उन्होंने घर पर पढ़ाई की और परीक्षा पास की. यूपीएससी की तैयारी करने वाले अन्य उम्मीदवारों की तरह, उन्होंने ट्यूशन के लिए दिल्ली जाने का विचार किया, लेकिन पैसे और बच्चों की जिम्मेदारियों के कारण उन्होंने खुद से पढ़ाई करने का फैसला किया.

उन्होंने परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग नहीं ली थी. वे अपने बेटे को अकेला नहीं छोड़ना चाहते थे. तैयारी के दिनों में उन्हें बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा, लेकिन फिर भी उन्होंने समय निकाला और दिन में 10 से 12 घंटे पढ़ाई की. आईएएस बनने के बाद परिवार में खुशी का माहौल था. अपनी सफलता और कड़ी मेहनत से पुष्पा जी ने महिलाओं को कमतर आंकने वाले लोगों को कड़ी प्रतिक्रिया दी है.