गरीबी और वि’कलांगता के बावजूद लड़की ने मानी नहीं हार, पहले ही प्रयास में बनी IAS अफसर..

जीवन में सपने तो हर किसी के होते हैं, उन्हें पूरा करने के लिए वे कड़ी मेहनत भी करते हैं, लेकिन कई लोग मुश्किलों और अक्सर परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते हैं. लेकिन कई लोग ऐसे भी होते हैं जो बाधाओं के बावजूद अपने सपनों तक पहुंचते हैं. ऐसी ही एक लड़की है उम्मुल खैर.

उम्मुल कम उम्र में ही वि’क’लां’ग’ता का शि’का’र हो गईं. वह बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं. अपनी वि’क’लां’ग’ता और बुरी परिस्थितियों के बावजूद, उसने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ उसने अपने पहले प्रयास में आईएएस अधिकारी बनने के अपने सपने को पूरा किया.

उम्मुल का परिवार बचपन से ही आर्थिक तंगी में था, उनके पिता सड़क किनारे मूंगफली बेचते थे. ये लोग दिल्ली के निजामुद्दीन की झुग्गियों में अपना जीवन यापन करते थे. लेकिन 2001 में वे त्रिलोकपुरी चले गए. जैसे ही वह अपना नया जीवन शुरू कर रही थी, उम्मुल की माँ की मृ’त्यु हो गई और उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली. उम्मुल को अपनी सौतेली माँ का साथ नहीं मिला. उसकी सौतेली मां उसे प्र’ता’ड़ि’त कर रही थी. पूरा परिवार उम्मुल की पढ़ाई के खिलाफ था.

समय के साथ, उम्मुल को घर पर रहना मुश्किल हो गया. लेकिन उसने हार नहीं मानी और किराए के मकान में रहने लगी. आर्थिक तंगी के कारण उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा. इन कठिनाइयों से निपटने के लिए उन्होंने बच्चों को पढ़ाकर अपना जीवन व्यतीत करना शुरू किया.

उम्मुल ने पांचवीं कक्षा तक एक वि’क’लां’ग स्कूल में पढ़ाई की और बाद में आठवीं कक्षा पूरी की. आठवीं कक्षा में उन्हें छात्रवृत्ति मिली जिससे उन्हें एक छोटी सी राशि मिली. इस राशि की मदद से उसने एक निजी स्कूल में प्रवेश लिया और वहां मैट्रिक परीक्षा में 90% अंक प्राप्त किए. इसके बाद उन्होंने बच्चों को पढ़ाकर दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की.

उम्मुल ने जेएनयू, दिल्ली में परास्नातक और एमफिल पूरा किया और यूपीएससी की तैयारी जारी रखी. कई कठिनाइयों को पार करते हुए, उम्मुल ने अपनी पूरी मेहनत से यूपीएससी के पहले दौर में सफलता हासिल की और 420वीं रैंक हासिल की.

उसने कहा कि वह अब अपने परिवार के साथ रहने की शिकायत नहीं करती है और जरूरत पड़ने पर उनकी देखभाल करने के लिए तैयार है. इस तरह अपनी मुश्किलों को पार करने वाली उम्मुल आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं.