7 साल पहले हुआ था पिता का नि’ध’न, 21 साल की उम्र में मेहनत कर बनी डिप्टी कलेक्टर!

कहा जाता है कि ‘प्रतिभा किसीं चीज की मोहताज नहीं होती.’ मेहनत और लगन से हर किसी का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. इस कहावत को शहर में रहने वाली एक लड़की निकिता ने साबित किया है.

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग में खरगोन कस्बे के कुंडनगर की रहने वाली निकिता मंडलोई ने एसटी वर्ग में अपने क्षेत्र में टॉप किया है. एमपीपीएससी 2018 परीक्षा के बाद केवल 286 अधिकारियों का चयन किया गया था और निकिता ने टॉप किया था. निकिता ने पहली बार परीक्षा दी थी. कड़ी मेहनत और लगन से वे डिप्टी कलेक्टर बनी हैं.

निकिता एसटी वर्ग में सबसे ऊपर है और उस क्षेत्र में 23वें स्थान पर है. भगवानपुरा प्रखंड के सुखपुरी में मंडलोई का एक परिवार है. निकिता के पिता मंगल सिंह एक शिक्षक थे और अपनी बेटी को डिप्टी कलेक्टर बनाने का सपना देखते थे. कुछ साल पहले उन्होंने कुंडा नगर में एक घर बनाया और यहीं बस गए.

उसके पिता की सात साल पहले मौ’त हो गई थी. नतीजतन, तीन बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी मां राधा मंडलोई पर आ गई. अपने पिता का समर्थन खोने के बाद, निकिता ने हार नहीं मानी और अच्छी तरह से पढ़कर अपने पिता के सपने को पूरा किया. बेटी की सफलता से परिवार का हर सदस्य खुश था.

निकिता की प्रारंभिक शिक्षा शहर के एक उत्कृष्ट विद्यालय में हुई. इसके बाद उन्होंने इंदौर के जीएसआईटीएस कॉलेज से बायोकेमिस्ट्री में इंजीनियरिंग की. कॉलेज में पढ़ते समय उनका चयन एक निजी कंपनी ने कर लिया था. जिसके जरिए उन्हें लाखों के पैकेज के साथ विदेश में नौकरी की पेशकश की गई, लेकिन निकिता ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और पीएससी की तैयारी शुरू कर दी.

ढाई साल की मेहनत के बाद निकिता ने परीक्षा पास की. अपने संदेश में निकिता ने कहा कि प्रत्येक छात्र को पढ़ाई के दौरान लक्ष्य हासिल करने के लिए दृढ़संकल्प होना चाहिए. जो आपको कठिन से कठिन समय में भी सफल बनाता है.

निकिता ने कहा कि उनके पिता के नि’ध’न के बाद उनकी मां ने उनका पालन-पोषण किया. मां और दो अन्य भाइयों ने भी समर्थन दिखाया. इसलिए वह आज यहां पहुंची हैं. निकिता के दो बड़े भाई राहुल मंडलोई कृषि विभाग में हैं और अंकित एक सरकारी शिक्षक हैं.